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छुआछुत ॰॰॰

बहा दी थी उसने सारी गंदगी गंदे नाले में जहां से बहकर पंहुच गई वो गंगा मे आज उसी के छु जाने से हो गया मैं अपवित्र तो किया गया मुझे पुनः पवित्र चंद छिंटे मेरे बदन पर डालकर उसी गंगाजल के ॰॰॰

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मेरा परिचय

  • नाम : गिरिराज जोशी
  • ठिकाना : नागौर, राजस्थान, India
  • एक खण्डहर जो अब साहित्यिक ईंटो से पूर्ननिर्मित हो रहा है...
मेरी प्रोफाईल

पूर्व संकलन

'कवि अकेला' समुह

'हिन्दी-कविता' समुह

धन्यवाद

यह चिट्ठा गिरिराज जोशी "कविराज" द्वारा तैयार किया गया है। ब्लोगर डोट कोम का धन्यवाद जिसकी सहायता से यह संभव हो पाया।
प्रसिद्धी सूचकांक :