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पाँच शेर - भाग ३

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क्‍या जले पर नमक छिडक रहे है,
चोट देने वाले तो पहले से ही काफी।
उनकी लिस्‍ट पहले से काफी लम्‍बी थी,
क्‍या आपका भी शमिल होना बाकी था।।

आप अच्‍छा‍ लिख रहे है लिखते रहें।

कुछ ह्ल्का-फ़ुल्का भी लिखा कीजिए। सच कहूं इन पंक्तियों का मूड कुछ समझ में नहीं आया।

अंतिम वाला सबसे अच्छा रहा.

गुस्से में आकर दीवार पे दे मारा
पहले दिल में दर्द था अब हाथ में है


:-)

मैने बांसुरी बजाना शुरू कर दिया है
पता चला जब से उसका नाम राधा है


कभी मौका लगे तो ओडियो अपलोड करना, मजा आयेगा बांसुरी सुनने में. :)

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मेरा परिचय

  • नाम : गिरिराज जोशी
  • ठिकाना : नागौर, राजस्थान, India
  • एक खण्डहर जो अब साहित्यिक ईंटो से पूर्ननिर्मित हो रहा है...
मेरी प्रोफाईल

पूर्व संकलन

'कवि अकेला' समुह

'हिन्दी-कविता' समुह

धन्यवाद

यह चिट्ठा गिरिराज जोशी "कविराज" द्वारा तैयार किया गया है। ब्लोगर डोट कोम का धन्यवाद जिसकी सहायता से यह संभव हो पाया।
प्रसिद्धी सूचकांक :