यह à¤à¤¿à¤à¥à¤ ा à¤à¤¿à¤°à¤¿à¤°à¤¾à¤ à¤à¥à¤¶à¥ "à¤à¤µà¤¿à¤°à¤¾à¤" दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ तà¥à¤¯à¤¾à¤° à¤à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤¯à¤¾ हà¥à¥¤ बà¥à¤²à¥à¤à¤° डà¥à¤ à¤à¥à¤® à¤à¤¾ धनà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¦ à¤à¤¿à¤¸à¤à¥ सहायता सॠयह सà¤à¤à¤µ हॠपाया।
पढै लिखै के ऐसी तैसी, छोलो घास चराओ भैसी।
यह कहावत मशहूर है।,
मै आपकी बात से पूर्ण रूपेण सहमत नही हूं मेहनत का परिणाम तो मिलता, आज तो कोई इधर उधर करके फर्स्ट क्लास पास हो जाता है किन्तु आगे वही बेरोजगारो की सूची मे आता है। मेहनत करने वाले तो सदाबहार रहते है। :)
- पà¥à¤°à¥à¤·à¤
बेनामी |
11/05/2006 12:47:00 pm
पहला बच्चा-
इतना पढ़ लिख कर भी बेचारा
मेहनत मजदूरी ही करता रह जाता है
दूसरा बच्चा-
जब भी बोर्ड का एग्जाम आता है
शायद ही 'पास' अपना परिणाम पाता है
- पà¥à¤°à¥à¤·à¤
bhuvnesh sharma |
11/05/2006 01:19:00 pm
बात तो खरी कही है.
- पà¥à¤°à¥à¤·à¤
संजय बेंगाणी |
11/06/2006 11:41:00 am
स्थिती विशेष पर अच्छा कटाक्ष है, बधाई.
- पà¥à¤°à¥à¤·à¤
Udan Tashtari |
11/06/2006 06:59:00 pm
प्रमेन्द्र जी सही कहते है।
मेहनत करने वाले कम में (अभावों में) ही सही पर खुश तो रहते हैं पर तथाकथित पढ़े लिखे ................
- पà¥à¤°à¥à¤·à¤
बेनामी |
11/06/2006 09:17:00 pm