"हेलो फोटो टेस्टिग"
नमस्कार!!!
मैं गिरिराज जोशी, शत् शत् नमन पर संवाददाता "कविराज" के साथ ब्लॉगस्पॉट डोट कॉम से चिट्ठा जगत के लिए प्रसारित होने वाले ताजा समाचार लिए उपस्थित हूँ। सबसे पहले सुनिये आज के ताजा समाचार॰॰॰
अरे क्या हुआ भाई काहे कह रहे हो कि हम पगलागये हैं, अरे तनिक बताईये तो हमका, ऐसा कौनौ काम किया हूँ???
मैं भी यही कह रहा हूँ भाई, प्रभू नारद का अतिरिक्त कार्यभार संभालते-संभालते "चिट्ठाचर्चा" को यह कैसा रोग लग गया? हम सुबह तक तो बिलकुल ठीक थे मगर जैसे ही चिट्ठाचर्चा डोट ब्लॉगस्पॉट डोट कॉम देखा जूकाम हो गया। अनुप भाई समाचार सुना रहे थे और वो भी तब जब चालिसियाये हैं, खैर जैब से रूमाल निकाल कर नाक पर मारा और आगे पढ़ने लगे॰॰॰
आगे समाचार था "कविराज की सांसे फूलनें लगी", हम कुछ समझे नहीं कि क्या करें? उम्र से तो चालिसियाये हैं मगर लगता है "सठिया" गये हैं। हमने तुरन्त "भगवान" से निवेदन किया कि उनकी तबियत तरो-ताजा रखें और भागे सिधे प्रभू श्री नारदजी के पास, मगर यह क्या जीतु भाई दरवाजे की ओर मुँह ताके खड़े थे?
हमने हिम्मत जुटा कर धिरे से पुछा - "जीतु भाई क्या कर रहे हो???"
जीतु भाई हमेशा कि तरह प्रेम से बोले - "फोटो टेस्टिंग" कर रहा हूँ।
हमने उनकी व्यस्तता में खलल डालना अनुचित समझा और चल दिये सिधे प्रभू के पास। दर्शननिर्वत होकर जैसे ही बाहर लौटे तो देखा जीतु भाई "आऊट", संजय भाई "इन"। अब अपने संजय भाई के साथ थोड़ी अच्छी पटती है तो सिधे ही पूछ लिया -
"बाहर क्या कर रहे हो, अन्दर जाकर प्रभू दर्शन काहे नहीं करते???"
संजय भाई बोले - "दिखता नहीं का फोटो टेस्टिंग कर रहा हूँ"
अरे बाप रे संजय भाई तो गुस्सा हो गये!!! हम पुनः प्यार से बोले -
"वो तो जीतु भाई कब के कर लिए, आप क्यों खालीपीली अपना टाईम खोटी कर रहे हो?"
संजय भाई ने एक बार की हमें घूर कर देखा फिर शायद यह सोचकर कि "यह अनाड़ी सचमुच नहीं जानता", हमें प्यार से समझाने लगे कि भईया अब प्रभू समाचार के साथ-साथ फोटो भी दिखायेंगे ताकि पता चल सके कि "ई मुंछवाला लिखा है", "ई चूटियावाली" और "ई ड्रेगनवा का चिट्ठा है" अब सोच लेईयो किस पर क्या टिप्पणी करनी है???
हमने प्रभू को मन ही मन प्रणाम किया और चलते बनें। अब आप भी "फोटो टेस्टिंग" करना चाहते हैं तो लेख पढ़िये और कीजिये -
"हेलो फोटो टेस्टिग"
का भईया,
का-का लिखोगे,
आछा-खासा कविता लिख रहे थे, चैनवा नहीं मिला का?
हाईकू लिखलेलाS , अब व्यंग्यवा भी खूब लिख रहे हो।
सही कहा था हमार बर-बुजुरग ने, आज के मानुस के सनतोस नाम के चीजे नहीं है।
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शैलेश भारतवासी |
10/19/2006 06:35:00 pm
वरिष्टों से पंगा मत लो मेरे भाई..
अच्छा लिखते हो, इसलिए सलाह देता हूँ, अनुपजी वगेरे..वगेरे से फोकस हटाओ तथा कोई अन्य मुद्दा पकड़ो. देखें इसबार गुदगुदाने को कौनसा मसाला लाते हो.
और हाँ, शुभ दीपावली.
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संजय बेंगाणी |
10/19/2006 07:53:00 pm
संजय भाई सलाह के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद!!!
वैसे हम तो विनोद कर रहे थे और वो भी बाकायदा अनुपजी से "परमिशन" लेकर (और उनके कहने पर ही), मगर फिर भी आपने सलाह दी है तो अमल जरूर करूँगा।
आगे भी इसी प्रकार मार्गदर्शन करते रहियेगा।
शुभ दीपावली!!!
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गिरिराज जोशी |
10/19/2006 08:08:00 pm
यार आप बडा मस्त लिखते हो... मजा आ जाता है। हा हा हा
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पंकज बेंगाणी |
10/19/2006 08:43:00 pm
कविवर से संवाददाता के रूप धर कर आपने अच्छा लिखा है। जो कुछ भी है तरह-2 के परिवर्तन के साथ चिठ्ठा चर्चा होनी चाहिये। कविता और समाचार का रूप तो ले लिया है। परिवर्तन के दौर मे महाभारत का रूप न लेले।
सभी को दीपावली की शुभकामनऐ
:)
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बेनामी |
10/19/2006 10:11:00 pm
बढि़या है. लगे रहो कविराज जी.
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अनूप शुक्ल |
10/20/2006 05:52:00 am
आप तो खुद ही नारद का रूप धर लिये हैं कविराज।
सूचना के लिये धन्यवाद।
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bhuvnesh sharma |
10/20/2006 05:31:00 pm
भैया जी हमने तो बहुत ट्राई की पर हमसे हुई ही नहीं फ़ोटो टेस्टिंग!!
वैसे कहने की ईशटाईल बहु अच्छी है आपकी
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Sagar Chand Nahar |
10/20/2006 06:42:00 pm